35- श्रीरासपंचाध्यायी -हनुमान प्रसाद पोद्दार श्रीभगवान गोपियों को बुलाने के लिये जब वंशीनाद करने लगे तो वह वंशीनाद चौरासी कोस व्रजमण्डल में प्रतिनिनादित हुआ। परन्तु वह ...
31- श्रीरासपंचाध्यायी हम देह को सुख देने के लिये, शरीर के आराम के लिये ही सारे पदार्थों का सेवन करते हैं। हमारा कमाना, खाना इन दो ही चीजों के लिये होता है। शरीर को आराम मिले और न...
34- श्रीरासपंचाध्यायी -हनुमान प्रसाद पोद्दार सबके नहीं आता किसी-किसी के ऐसा सौभाग्य का क्षण आता है जब विषय में विराग की उत्पत्ति होती है। विषय बुरे लगते हैं कि इनमें तो फँसन...
33- श्रीरासपंचाध्यायी -हनुमान प्रसाद पोद्दार न कर्मबन्धनं जन्म वैष्णवानां हि विधियते। जन्म मृत्यु जरा व्याधि विमुक्तास्ते न संशयः। जो भगवत्गण हैं वे कभी कर्माधीन होकर ...