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भाग 6अध्याय 2

श्रीकृष्णजी, श्रीराधारानी व गोपियों का संवाद~अथ श्रीगीतगोविन्दम्             अथ द्वितीय: सर्ग: हस्तस्रस्तविलासवंशमनृजुभ्रूवल्लिम- द्वल्लवीवृन्दोत्सारिदृगन्तवी...

भाग 7अध्याय 3

अथ श्री गीतगोविन्दम्    अथ   तृतीय   सर्ग: कंसारिरपि संसारवासनाबन्धश्रृख्ङलाम्। राधामाधाय हृदये तत्याज ब्रजसुन्दरी:।। १।। श्रीकृष्णचन्द्रजी ने सांसारिक को बाँधन...

भाग 8 अध्याय 3

अथ श्रीगीतगोविन्दम् अथ   तृतीय   सर्ग:             भ्रूपल्लवं धनुरपांगतरंगितानि बाणागुण: श्रवणपालिरिति स्मरेण। तस्यामनंगजयजंगमदेवतायामस्त्राणि निर्जितजगन्ति ...

भाग 9 अध्याय 4

अथ श्री गीतगोविन्दम् अथ   चतुर्थः   सर्गः यमुनातीरवानीरनिकुञ्जे मन्दमास्थितम्। प्राह प्रेमभरोद्भ्रान्तं माधवं राधिकासखी।। १।। श्रीयमुना नदी के तीर बेंतों के कु...

भाग 10अध्याय 4

अथ श्रीगीतगोविन्दम् अथ  चतुर्थ  सर्गः~२ आवासो विपिनायते प्रियसखीमालापि जालायते तापो पि श्र्वसितेन दावादहनज्वालाकलापायते। सापि त्वद्विरहेण हन्त हरिणीरूपायते हा ...

भाग 11 अध्याय 4

अथ श्रीगीतगोविन्दम् अथ   चतुर्थः   सर्गः ~३ सा रोमाञ्चति सीत्करोति विलपत्युत्कम्पते ताम्यति ध्यायत्युद्भ्रमति प्रमीलति पतत्युद्याति मूर्च्छत्यपि। एतावत्यतनु...

भाग 12 अध्याय 5

अथ श्रीगीतगोविन्दम् अथ  पंचमः  सर्गः ~प्रथमः अहमिह निवसामि याहि राधा- मनुनय मद्वचनेन चानयेथाः । इति मधुरिपुणा सखी नियुक्ता स्वयमिवमेत्य पुनर्जगाद राधाम्।। १।। श्री...